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शुक्रवार, 13 मई 2011

केएसके प्लांट में ठेका श्रमिक की संदिग्ध मौत

- प्रबंधन ने लावारिश बताकर जिला अस्पताल भेजा शव

केएसके महानदी पावर प्लांट में कार्यरत् एक ठेका श्रमिक की आज संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। घटना के बाद कंपनी प्रबंधन के अधिकारियों ने परिजनों को सूचित किए बगैर लाश को लावारिश बताकर जिला अस्पताल भिजवा दिया। मृतक के शरीर के कई हिस्सों में चोट के निशान मिले हैं।

पामगढ़ थाना अंतर्गत ग्राम मुलमुला निवासी शमशेर सिंह सारथी (21 वर्ष) पिता मिल्का सिंह सारथी ने नरियरा में निर्माणाधीन केएसके महानदी पावर कंपनी में ११ मई को ठेका श्रमिक बतौर काम शुरू किया था। १३ मई को सुबह 8 बजे वह ड्यूटी पर पहुंचा और प्लांट के नरियरा गेट के पास काम करने लगा। लगभग 2 घंटे काम करने के बाद उसकी अचानक मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर सैकड़ों श्रमिक इकट्ठे हो गए और मृतक शमशेर के शरीर पर चोंट देखकर हंगामा करने लगे। इधर मामले की सूचना पाकर कंपनी के कुछ अधिकारी भी घटनास्थल पहुंचे और पामगढ़ पुलिस को जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंच पाती, इससे पहले ही अधिकारियों ने हंगामा के भय से मजदूर के शव को लावारिश बताते हुए वाहन में भरकर जिला अस्पताल भिजवा दिया। दोपहर लगभग 12 बजे पावर प्लांट के कुछ श्रमिकों ने जिला अस्पताल पहुंचकर मृतक की शिनाख्त शमशेर सिंह के रूप में की। इसके बाद परिजनों को घटना की खबर दी गई। परिजनों के अस्पताल में इकट्ठा होते तक शाम हो गया, इस वजह से मृतक का आज पोस्टमार्टम नहीं हो सका। बहरहाल मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर पंचनामा के बाद शव को मरचुरी में रखवा दिया है।

गेट के बाहर पड़ी थी लाश
मृतक शमशेर सिंह साइकिल से प्लांट पहुंचा था और उसने ड्यूटी भी की। मगर उसकी लाश प्लांट के नरियरा गेट के बाहर लावारिश पड़ी हुई थी, जबकि साइकिल प्लांट के अंदर स्टैण्ड में था। जिला अस्पताल पहुंचे मृतक शमशेर सिंह के साथी मजदूरों ने बताया कि घटना के बाद कंपनी प्रबंधन ने शव को बाहर फेंकवा दिया है, ताकि प्लांट में किसी तरह का हंगामा न हो और मृतक के परिजनों को मुआवजा न देना पड़े।

पहले भी हो चुका है बवाल
केएसके महानदी पावर प्लांट में कार्यरत् एक ठेका मजदूर की मौत पिछले साल करंट की चपेट में आने से हुई थी। उस समय भी कंपनी प्रबंधन ने विवादों से बचने के लिए मृतक श्रमिक की लाश को परिजनों को सूचित किए बगैर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया था। तब सैकड़ों श्रमिकों ने प्लांट के भीतर जमकर बवाल किया था। घंटे हंगामा के बाद कंपनी प्रबंधन द्वारा मृतक के परिजनों को मुआवजा व नौकरी देने के आश्वासन पर ही मामला शांत हुआ था।

कैदी की पिटाई से संतोष की मौत !

0 जेलर ने दिया कलेक्टर व एसपी को प्रतिवेदन

एट्रोसिटी एक्ट के मामले में जेल भेजे गए आरएमपी डाक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एक बार फिर नई कहानी सामने आई है। कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को जेलर द्वारा भेजा गया प्रतिवेदन चौंकाने वाला है, जिसमे कैदी संतोष की मौत पुलिस या जेलकर्मियों की पिटाई से नहीं, बल्कि एक अन्य कैदी द्वारा मारपीट किए जाने से होने की बात लिखी गई है। इससे मृत कैदी के परिजनों ने जेलर के प्रतिवेदन पर कई तरह के सवाल उठाए हैं।
जांजगीर-चाम्पा जिले के केरा रोड जांजगीर में क्लिनिक संचालित करने वाले आरएमपी डाक्टर संतोष श्रीवास को एट्रोसिटी के मामले में 30 अप्रेल को जेल भेजा गया था, इसके तीन दिन बाद संदिग्ध अवस्था में उसकी मौत हो गई। मृतक के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान होने केक कारण जांजगीर पुलिस और जेल प्रशासन संदेह के घेरे में आ गए थे। 3 मई की सुबह संतोष श्रीवास को बीमार होने की बात कहकर जिला चिकित्सालय लाया गया, जबकि उसकी मौत पहले ही हो चुकी थी। इस संबंध में जेलकर्मी व जांजगीर पुलिस अलग अलग बयान देते रहे। मगर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संतोष के शरीर पर चोटों के निशान कहां से आए। जांच करने पहुंचे एसडीएम के समक्ष सभी अधिकारी गोलमोल जवाब देकर बचते रहे। जांजगीर पुलिस ने मामले का पूरा ठीकरा जेलर पर थोप दिया था, वहीं जेलर घटना के लिए पुलिस को जिम्मेदार बता रहे थे। इस मामले में अब फिर से नई कहानी सामने आई है। कलेक्टर ब्रजेश चंद्र मिश्र व पुलिस अधीक्षक डा. आनंद छाबड़ा को 9 मई को एक जेलकर्मी के हाथ जेलर ए. के. चंद्राकर द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन में कैदी संतोष श्रीवास की मौत उसी बैरक में निरूध्द बंदी चंद्रपुर निवासी अश्विनी उर्फ पप्पू माली द्वारा की गई मारपीट से होने की बात लिखी है। ऐसे में जेलर के प्रतिवेदन से कई तरह के संदेह उठ रहे हैं। जेलर के प्रतिवेदन पर जांजगीर पुलिस ने आनन फानन में कैदी अश्विनी पर हत्या का जुर्म दर्ज किया है। मामला तूल पकड़ने के बाद यह बात भी सामने आई है कि मृतक संतोष के परिजन जब उसका मृत्यु प्रमाण पत्र लेने नगरपालिका जांजगीर गए, तो प्रमाण पत्र जेलर द्वारा ले जाने की बात पता चली। नगरपालिका के कर्मचारियों से पूछने पर परिजनों को यह भी पता लगा कि घटना के बाद जेलर ने आनन फानन में मृत्यु प्रमाण पत्र ले लिया है। जबकि नियमों के तहत् मृतक के परिजनों को ही इसका अधिकार है। मृतक संतोष के रिश्तेदार बलौदा निवासी डा. सी पी सेन ने बताया कि जांजगीर पुलिस व जेल प्रशासन खुद को बचाने के लिए तरह-तरह की कहानियां गढ़ रहा है। पहले जेलर द्वारा यह कहा गया था कि संतोष की मौत शराब के नशे में हुई है, वह शराब पीने के बाद दीवार से टकराकर मर गया। वहीं जिला चिकित्सालय लाए जाने के बाद जेलर ने कहा कि वह बीमार था, जिससे उसकी मौत हुई। अब इस मामले में नई कहानी गढ़ी जा रही है कि बैरक नंबर 5 में बंद अश्विनी नामक एक कैदी ने पीट पीटकर उनकी हत्या की है। बहरहाल कैदी की मौत का मामला तूल पकड़ने लगा है। मामले में दंडाधिकारी जांच के अलावा पुलिस अधीक्षक ने स्पेशल टीम गठित की है। लेकिन हर बार नई कहानी सामने आने से परिजनों ने जांच टीम पर अविश्वास जताते हुए उच्चस्तर से मामले की छानबीन कराने की बात कही है।