
"वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए शुक्रवार को पेश किए गए बजट में रेल मंत्री ममता बनर्जी ने यात्री और माल ढुलाई भाड़े में एक बार फिर बिना कोई वृद्धि करते हुए कई लोक-लुभावन घोषणाएं की। खासकर रेल मंत्री ने पश्चिम बंगाल को दिल खोलकर सौगातें दीं है। चूंकि पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य को लोगों को अपनी तरफ से देने के लिए उनके पास अंतिम मौका था। अलबत्ता ‘चुनावी पटरी पर सपरट दौड़ने में ममता एक्सप्रेस’ ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। नए रेल बजट में रेलमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग पर भी विशेष दया दिखाई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लिए दो नई रेल परियोजनाओं को रेल मंत्री ने अपने बजट में रखा, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया गया है। किरंदुल-जगदलपुर केके लाइन के दोहरीकरण को भी हरी झंडी मिल गई है। यह लाइन बस्तर के रेलवे नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। लिहाजा इन योजनाओं पर अमल होने से नक्सली गढ़ में रेल सेवाओं के विस्तार और तरक्की की उम्मीद की जा रही है।"
नए वित्तीय वर्ष के रेल बजट के लिए जैसी उम्मीद थी, ठीक वैसे ही लोक-लुभावन रेल बजट पेश कर ममता दीदी ने सभी को खुश करने की कोशिश की। शुक्रवार को लोकसभा में पेश रेल बजट 2011-12 में रेल मंत्री ने लगातार आठवें वर्ष यात्री किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की। ममता के अनुसार वह रेल के जरिए एक सामाजिक क्रांति की बुनियाद रखना चाहती हैं, जिसे प्रधानमंत्री रेलवे विका
स योजना का नाम दिया जाएगा। भारतीय रेल आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देने की कोशिश कर रही है।
रेल बजट में बंगाल पर मेहरबानी दिखाते हुए ममता ने कोलकाता मेट्रो रेलवे को17 वां जोन घोषित किया। वहीं पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में रेल कारखाना, सिंगूर के करीब मेट्रो कोच फैक्ट्री खोले जाने संबंधी प्रस्ताव पर मुहर लगी। ममता दीदी ने हर वर्ग का ख्याल रखते हुए एसी और नॉन एसी टिकटों की बुकिंग दर में पचास प्रतिशत की कटौती की, जबकि 58 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में शामिल कर उन्हें टिकट रियायती दर का लाभ दिया गया। इसके अलावा 56 नई एक्सप्रेस ट्रेनें तथा छात्रों के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की। यही नहीं ममता दीदी ने अपने बजट में गरीबों पर भी खूब प्रेम लुटाया है। उन्होंने ‘गृह योजना’ पर संसद में मुहर लगवाकर कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों में पटरी किनारे बसने वाले परिवारों के लिए खुद का आशियाना दिलवाने का प्रयास किया है। इसके अलावा खिलाडियों को नौकरी देने के लिए रेलवे में स्पोर्ट्स कैडर, राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस में विकलांगों के लिए सीट आरक्षण, मान्यता प्राप्त पत्रकारों को परिवार सहित साल में दो बार निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा, कीर्ति और शौर्य चक्र विजेता
ओं के लिए विशेष यात्रा सुविधा, रेलवे कर्मचारियों के प्रतिभाशाली बच्चों को छात्रवृत्ति, प्वाइंट्समैन, लीवरमैन, खलासी जैसे रेलवे कर्मचारियों के 50 की उम्र के बाद नौकरी करने में असक्षम होने की स्थिति में उनके बच्चों को नौकरी, 13 हजार आरपीएफ जवानों की नई भर्तियां, 16 हजार पूर्व फौजियों को नया रोजगार देने के अलावा नए रेल बजट में और भी कई प्रस्ताव शामिल है। कुल मिलाकर रेल बजट पेश करते हुए ममता ने रेल आधारभूत संरचना क्षेत्र में 57,630 करोड़ रुपये के निवेश और 68 नई रेलगाड़ियां चलाने के साथ कई ‘लुभावने’ प्रस्ताव पेश किए।
नए वित्तीय वर्ष के रेल बजट के लिए जैसी उम्मीद थी, ठीक वैसे ही लोक-लुभावन रेल बजट पेश कर ममता दीदी ने सभी को खुश करने की कोशिश की। शुक्रवार को लोकसभा में पेश रेल बजट 2011-12 में रेल मंत्री ने लगातार आठवें वर्ष यात्री किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की। ममता के अनुसार वह रेल के जरिए एक सामाजिक क्रांति की बुनियाद रखना चाहती हैं, जिसे प्रधानमंत्री रेलवे विका
स योजना का नाम दिया जाएगा। भारतीय रेल आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देने की कोशिश कर रही है।रेल बजट में बंगाल पर मेहरबानी दिखाते हुए ममता ने कोलकाता मेट्रो रेलवे को17 वां जोन घोषित किया। वहीं पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में रेल कारखाना, सिंगूर के करीब मेट्रो कोच फैक्ट्री खोले जाने संबंधी प्रस्ताव पर मुहर लगी। ममता दीदी ने हर वर्ग का ख्याल रखते हुए एसी और नॉन एसी टिकटों की बुकिंग दर में पचास प्रतिशत की कटौती की, जबकि 58 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में शामिल कर उन्हें टिकट रियायती दर का लाभ दिया गया। इसके अलावा 56 नई एक्सप्रेस ट्रेनें तथा छात्रों के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की। यही नहीं ममता दीदी ने अपने बजट में गरीबों पर भी खूब प्रेम लुटाया है। उन्होंने ‘गृह योजना’ पर संसद में मुहर लगवाकर कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों में पटरी किनारे बसने वाले परिवारों के लिए खुद का आशियाना दिलवाने का प्रयास किया है। इसके अलावा खिलाडियों को नौकरी देने के लिए रेलवे में स्पोर्ट्स कैडर, राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस में विकलांगों के लिए सीट आरक्षण, मान्यता प्राप्त पत्रकारों को परिवार सहित साल में दो बार निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा, कीर्ति और शौर्य चक्र विजेता
ओं के लिए विशेष यात्रा सुविधा, रेलवे कर्मचारियों के प्रतिभाशाली बच्चों को छात्रवृत्ति, प्वाइंट्समैन, लीवरमैन, खलासी जैसे रेलवे कर्मचारियों के 50 की उम्र के बाद नौकरी करने में असक्षम होने की स्थिति में उनके बच्चों को नौकरी, 13 हजार आरपीएफ जवानों की नई भर्तियां, 16 हजार पूर्व फौजियों को नया रोजगार देने के अलावा नए रेल बजट में और भी कई प्रस्ताव शामिल है। कुल मिलाकर रेल बजट पेश करते हुए ममता ने रेल आधारभूत संरचना क्षेत्र में 57,630 करोड़ रुपये के निवेश और 68 नई रेलगाड़ियां चलाने के साथ कई ‘लुभावने’ प्रस्ताव पेश किए।देश में रेल बजट को तैयार करने का समय जैसे ही आता है, जनता में यह भावना होती है कि यात्री किराया न बढ़े और अधिक से अधिक सुविधाएं दी जाएं। ऐसे में रेल मंत्री पर उपलब्ध संसाधनों में अधिक से अधिक सुविधा देने का दबाव होता है। रेलवे परिवहन का प्रमुख साधन होने के कारण किराया व भाड़े में वृद्धि का असर आम आदमी महसूस करता है। रेलमंत्री ने इसमें वृद्धि न कर आम जनता को राहत दी है। जनसरोकार के साथ मौजूदा बजट को देखें, तो इसमें संसाधनों के विकास की झलक दिख रही है
। नयी गाड़ियां शुरू करने के साथ ही रेल मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी खासा तवज्जों दी है। सबसे अच्छी बात यह रही कि रेलवे ने रेल-ट्रैक के विस्तार पर भी इस बार जोर दिया है। यह पहला मौका है जब किसी मंत्री ने बजट पेश करते समय पूवरेत्तर के राज्यों और जम्मू-कश्मीर पर भी विशेष ध्यान दिया है। रेल में सुरक्षा के लिए एंटी कोलिशन डिवाइस के इस्तेमाल की घोषणा कर इसकी रोकथाम की दिशा में कदम उठाना शुभ संकेत है।
। नयी गाड़ियां शुरू करने के साथ ही रेल मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी खासा तवज्जों दी है। सबसे अच्छी बात यह रही कि रेलवे ने रेल-ट्रैक के विस्तार पर भी इस बार जोर दिया है। यह पहला मौका है जब किसी मंत्री ने बजट पेश करते समय पूवरेत्तर के राज्यों और जम्मू-कश्मीर पर भी विशेष ध्यान दिया है। रेल में सुरक्षा के लिए एंटी कोलिशन डिवाइस के इस्तेमाल की घोषणा कर इसकी रोकथाम की दिशा में कदम उठाना शुभ संकेत है। हालांकि शुक्रवार को घोषित नयी योजनाओं को लेकर यह साफ नहीं किया गया है कि इसके लिए पूंजी कहां से जुटायी जायेगी, इसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। रेलवे की माली हालत बेहद खस्ता है और रेल मंत्री खुद भी इस बात को कबूल कर रही हैं। ऐसे मे एक प्रमुख सवाल यह भी है कि बजट में जिन बड़ी-बड़ी योजनाओं का ऐलान किया गया है, उसे ठीक ढंग से लागू किया जा सकेगा या योजनाएं महज औपचारिक होकर रह जाएंगी। खैर जो भी है, लेकिन इस बार के रेल बजट में देश के सभी राज्यों को रेल मंत्री ने बराबर की तवज्जों दी हैं। यह बात अलग है कि उन्होंने अपने राज्य को थोड़ा-बहुत ज्यादा दिया है। मगर ऐसा तो ममता दीदी ने ही नहीं बल्कि अब तक के सभी रेल मत्रियों ने किया है।