रविवार, 26 मई 2013

सरकार के लिए नक्सलवाद बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ समेत भारत के सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में जनजीवन सुरक्षित होने का पुलिस भले ही दावा करे, लेकिन लगातार बढ़ रही नक्सली वारदातों से किसी के जनजीवन को सुरक्षित नहीं कहा जा सकता है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल, पूर्व मंत्री और सलवा जुडूम के प्रणेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और दिनेश पटेल सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों की निर्मम हत्या और विद्या चरण शुक्ल समेत कई नेताओं पर हुए नक्सली हमले ने पुलिस और राज्य की भाजपा सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर, जगदलपुर, सुकमा, नारायणपुर, बलरामपुर, सूरजपुर, राजनांदगाँव, जशपुर आदि जिलों में सुरक्षा की जो स्थिति है, उस पर गंभीर प्रश्नवाचकचिन्ह नजर आता है। ऐसे में अब गलतियों को सुधारने पर ध्यान देना केन्द्र व राज्य सरकार की अहम जिम्मेदारी बनती है। साथ ही नक्सल प्रभावित राज्यों में सत्तासीन सरकार को कोशिश करना चाहिए कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना फिर न हो। जहां ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जहां प्रशासन अतिसंवेदनशील है, वहां सुरक्षा का स्तर ऊंचा होना चाहिए। नक्सलियों व आतंकियों का एक लक्ष्य होता है और वे अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए ऐसी वारदात करते हैं, ताकि अपनी मांग मनवाने के लिए सौदा कर सकें। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सली हिंसा को राष्ट्र के सामने बड़ी चुनौती माना है। प्रधानमंत्री सिंह का कहना है कि यह एक राष्ट्रीय समस्या है, इसका जो समाधान है, वह राष्ट्रीय स्तर पर भी है और प्रादेशिक स्तर पर भी। जब तक राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच पूरी समझ के साथ काम नहीं होगा, तब तक नीति बनाने और उसे लागू करने में समस्याएं आएंगी। यह बहुत दुर्भाग्य की स्थिति है कि नक्सल हिंसा को अभी भी राज्य की कानून-व्यवस्था की समस्या माना जा रहा है। हमारे संविधान के अंदर राष्ट्रीय सुरक्षा नाम का कोई वर्णन नहीं है। हम अभी भी यह समझ रहे हैं कि आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बीच कोई फर्क नहीं है। नक्सलवाद कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, आंतरिक सुरक्षा का विषय है। भारत के कई राज्यों और नेपाल में नक्सलवाद फैला है, जबकि भारत के ही आंध्रप्रदेश में कड़े कदम उठाए गए, तो नक्सलवादी वहां से खिसककर उड़ीसा, झारखंड में घुस गए हैं। नक्सलवादियों को बारूद, हथियार, पैसा कहां से आ रहा है? इस पर विचार करें, तो यह अंतरराष्ट्रीय समस्या हो जाती है। नक्सल समस्या को खत्म करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार को आंतरिक सुरक्षा को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योकि आज नक्सलवाद बड़ी चुनौती है, इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को पूरी ताकत लगाना होगा।

1 टिप्पणी:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त

आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।